गया, बिहार - गोलपत्थर मंदिर में दुर्गा पूजा के शुभ अवसर पर एक विशाल और भव्य सशस्त्र मातृ शक्ति शोभायात्रा का आयोजन किया गया। इस शोभायात्रा का संरक्षण महंथ राजीव रंजन दास महाराज ने किया और निर्देशन नीरज त्रिपाठी द्वारा किया गया। इस अद्वितीय आयोजन में गयाजी की लगभग 5 हजार माताएँ, बहनें और बेटियाँ अपने हाथों में तलवार लेकर सम्मिलित हुईं, जिन्होंने स्वयं के भीतर माँ दुर्गा की शक्ति का आह्वान किया।
शोभायात्रा की विशेषताएँ:
इस शोभायात्रा की भव्यता की एक झलक इसके विशेष झांकियों से मिलती है। पाँच घोड़ों पर सवार लक्ष्मीबाई का जीवंत चित्रण, तथा तीन ओपन जीपों पर नौ दुर्गाओं का रूप धारण करके बेटियों की सहभागिता ने इस शोभायात्रा को और भी खास बना दिया। इसके अतिरिक्त, रथ पर गोलपत्थर मंदिर पीठाधीश्वर महंथ श्रीमान राजीव रंजन दास जी महाराज का शामिल होना, इस धार्मिक यात्रा को एक उच्च आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।
परशुराम गुरुकुल का युद्ध कौशल प्रदर्शन:
इस शोभायात्रा के दौरान आजाद पार्क में परशुराम गुरुकुल के शिष्यों द्वारा युद्धकला का विशेष प्रदर्शन किया गया। यह कार्यक्रम पहली बार दोनों हाथों से तलवार और लाठी के प्रयोग से लड़ा गया, जो दर्शकों के बीच गहरा प्रभाव छोड़ गया। परशुराम गुरुकुल के संचालक श्रीमान नीरज त्रिपाठी के निर्देशन में इस युद्धकला का प्रदर्शन किया गया, जिसमें 3 साल के बच्चों से लेकर 60 वर्ष के वृद्ध तक भागीदार बने। इस प्रदर्शन ने आत्मरक्षा के महत्व को रेखांकित किया, विशेष रूप से बेटियों के लिए, ताकि वे अबला से सबला बन सकें।
परशुराम गुरुकुल का योगदान:
परशुराम गुरुकुल द्वारा दी जाने वाली आत्मरक्षा की शिक्षा समाज में बेटियों को सुरक्षा और सशक्तिकरण का नया दृष्टिकोण देती है। इस गुरुकुल का उद्देश्य है कि हर बेटी शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम हो सके और आत्मरक्षा के गुर सीखकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो। इस आयोजन में परशुराम गुरुकुल के शिष्यों पंकज लोहानी, मनीष कुमार वर्णवाल, राकेश कुमार, रोहित एकघरा, एस के भगवा, कुमार रोहित पांडे, सौरव पांडे, अमन कुमार, विवेक कुमार (लक्की), दीपक पांडे, मनीष कुमार, डब्लू कुमार, शोनू कुमार, रोहित कुमार रौशन और सुषमा लोहानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
यात्रा का मार्ग और समापन:
यह भव्य शोभायात्रा गोलपत्थर मंदिर से प्रारंभ होकर टेकारी रोड, बाटा मोड़, स्टेशन रोड, गुरुद्वारा रोड होते हुए गोलपत्थर हनुमान मोड़ पर समाप्त हुई। इस यात्रा में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का भी आयोजन किया गया, जिससे पूरे वातावरण में भक्ति और श्रद्धा का संचार हुआ।
सामाजिक संदेश:
यह शोभायात्रा केवल धार्मिक आस्था और भक्ति का प्रतीक नहीं थी, बल्कि इसमें एक गहरा सामाजिक संदेश भी निहित था। बेटियों को सबला बनाने और समाज में आत्मरक्षा की अनिवार्यता पर जोर दिया गया। इस आयोजन ने समाज को यह संदेश दिया कि बेटियाँ अबला नहीं, बल्कि सशक्त और आत्मनिर्भर हो सकती हैं। यह यात्रा मातृशक्ति के अद्वितीय संगम का प्रमाण थी, जिसमें हजारों महिलाओं ने माँ दुर्गा का आह्वान करते हुए स्वयं को एक नई पहचान दी।
निष्कर्ष:
इस सशस्त्र मातृ शक्ति शोभायात्रा ने ना केवल गया शहर को धार्मिक रंगों में रंग दिया, बल्कि समाज को मातृशक्ति के महत्व और उनकी सशक्तिकरण के प्रति जागरूक किया। यह आयोजन निश्चित रूप से आने वाले वर्षों के लिए एक प्रेरणास्रोत बनेगा।
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